बदलती जीवनशैली से बढ़ रही आंखों की बीमारियां, क्या कहते हैं नेत्र विशेषज्ञ?
दैनिक जागरण के ‘हैलो जागरण’ कार्यक्रम में नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हितेंद्र आहूजा ने बदलती जीवनशैली के कारण बढ़ती आंखों की बीमारियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपचार उपलब्ध होने के बावजूद लोग समय पर जांच नहीं कराते, जिससे समस्याएं गंभीर हो रही हैं।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित हैलो जागरण कार्यक्रम में आंखों की बीमारियों को लेकर लोगों की बढ़ती लापरवाही और बदलती जीवनशैली के असर पर नेत्र विशेषज्ञ ने चिंता जताई है।
कार्यक्रम के दौरान आहूजा नेत्र एवं दंत संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. हितेंद्र आहूजा ने पाठकों को फोन काल के माध्यम से उनके सवालों के जवाब देते हुए बताया कि आज चिकित्सा क्षेत्र में आंखों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं पहले की तुलना में काफी बेहतर हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर जांच न कराने की प्रवृत्ति के कारण मरीजों की समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि अब आंखों की बीमारियां केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। बदलती जीवनशैली और बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों और युवाओं की आंखों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। ऐसे में आंखों में जलन, धुंधलापन, सिरदर्द, पानी आना या कम दिखाई देने जैसी शुरुआती समस्याओं को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।
वहीं, कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के फोन आए, जिन्होंने आंखों की समस्याओं के बारे में डा. आहूजा से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को हल्के में न लें और समय रहते विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श लेकर नियमित जांच कराते रहें, ताकि दृष्टि संबंधी गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।
मेरा नाम लोकेस चौधरी है और 50 वर्ष की हूँ। मुझो पिछले डेढ़ साल से कभी-कभी 5–10 सेकंड के लिए अचानक सब धुंधला या डबल दिखाई देने लगता है, फिर अपने आप ठीक हो जाता है। क्या यह आंखों की समस्या है?
देखिए, यह समस्या केवल आंखों की नहीं, बल्कि शरीर की अन्य स्थितियों (सिस्टमिक प्राब्लम) से भी जुड़ी हो सकती है। खासकर ब्लड प्रेशर के उतार-चढ़ाव से ऐसा होता है। आप एक हफ्ते तक सुबह-शाम का बीपी रिकार्ड रखें और पहले जनरल फिजिशियन से जांच कराएं। इसके बाद जरूरत पड़े तो आंखों के डाक्टर को दिखाएं।
मेरा नाम पलक है। मेरी आंखों में बहुत खुजली होती है। सुबह उठते ही पानी आता है और आंखों के नीचे काले घेरे भी हो गए हैं। क्या करूं?
यह एलर्जी या ड्राइ आइ की समस्या हो सकती है। दिन में 2-3 बार साफ पानी से आंखें धोएं। आंखों की सफाई रखें। जरूरत पड़ने पर डाक्टर को दिखाएं। उनकी सलाह पर दी गई आइ ड्राप्स इस्तेमाल करें। अगर समस्या बनी रहे तो आंखों की जांच जरूर कराएं।
मेरा नाम जयप्रकाश है। मुझे कभी-कभी आंखों में भारीपन और अचानक धुंधलापन भी महसूस होता है। क्या यह बीपी से जुड़ा हो सकता है?
हां, ब्लड प्रेशर के फ्लक्चुएशन (ऊपर-नीचे होने) से आंखों पर असर पड़ सकता है। इसलिए एक हफ्ते का बीपी चार्ट बनाएं। नमक और खान-पान पर नियंत्रण रखें। जरूरत पड़े तो डाक्टर को दिखाकर दवा शुरू करें।समस्या से आराम मिलेगा।
मेरा नाम धर्मवीर है। मेरी आंख में लेंस डलवाया है। दूर का तो साफ दिखता है, लेकिन पास का बिना चश्मे के नहीं दिखता। क्या यह सामान्य है?
हां, यह सामान्य है। लेंस लगाने का मकसद चश्मे की जरूरत को कम करना होता है, पूरी तरह खत्म करना नहीं। हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। कुछ को छोटे अक्षर पढ़ने के लिए चश्मा लग सकता है।
मेरा नाम जयप्रकाश है। धूप में आंखों में जलन और सनसनाहट होती है। क्या करें?
देखिए, यह ड्राइ आइ या सेंसिटिविटी की वजह से हो सकता है। डाक्टर द्वारा दी गई लुब्रिकेटिंग आइ ड्राप इस्तेमाल करें। धूप में सनग्लासेस पहनें और आंखों को सूखने से बचाएं। साथ ही समय-समय पर आंखों की जांच जरूर कराएं।
डाक्टर साहब मेरा नाम विनोद है। मैं कंप्यूटर पर लगातार काम करता हूं, आंखों में ड्रायनेस और दबाव रहता है। इससे कैसे बचें?
अगर आप लगातार कंप्यूटर या फोन पर अधिक काम कर रहे हैं तो आपको आंखों को देखभाल करनी होगी। लगातार कंप्यूटर पर काम करने और फोन या टीवी देखने से आंखों में सूखापन आ जाता है। आपकी दूर की नजर कमजोर हो जाती है। जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं तो कुछ कुछ देर में आंखों को बंद करें और खोलें। आप लगातार कंप्यूटर या टीवी के सामने ना रहें। हर आधा घंटे में आंखों को आराम दें।
आंखों को बंद कर लें और कुछ देर के लिए नजरें किसी दूसरी तरफ लगाएं। हो सके ताे दूर की किसी वस्तु को देखें। कंप्यूटर पर काम करते समय हर बीस मिनट बाद अपना चेहरा दूसरी तरफ करें वा अपने सहयोगी के कुछ कुछ बात करते रहें।
डाक्टर साहब मेरा नाम जोगिंदर सिंह है। आंखों में कभी-कभी पानी आता है।
आप डाक्टर को जरूर दिखाएं। क्योंकि आपकी आयु अधिक है लेकिन आपके कहने के अनुसार कोई बीमारी नहीं है। यह वायु प्रदूषण के कारण है और डाक्टर से ऐसी दवा ले लें जो इसमें राहत देगी। दिन में पानी से आंखों को साफ करते रहे। कोशिश करें ऐसी जगह कम जाएं जहां पर प्रदूषण अधिक हों। क्योंकि अब आपको आंखों में इंफेक्सान होने लगा है।
डाक्टर साहब मेरा नाम जयप्रकाश है और उम्र 50 साल है। मुझे पास का कम दिखाई देता है। क्या चश्मा हटाने का कोई तरीका है?
यह उम्र के साथ होने वाली सामान्य समस्या (प्रेस्बायोपिया) है। इसमें पढ़ने के लिए चश्मा जरूरी होता है
बिना चश्मे के इसे पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं है। इसलिए सही नंबर का चश्मा लगाना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
मेरा नाम राजेश पटेल है। मुझे पढ़ते समय आंखों में समस्या होती है, जबकि मैं चश्मा भी लगाता हूँ। क्या कारण हो सकता है?
देखिए, इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे चश्मे का नंबर बदल जाना, आंखों में कमजोरी, शुरुआती मोतियाबिंद आदि। इसलिए एक बार पूरा आई चेकअप कराना जरूरी है, तभी सही कारण पता चलेगा।
मेरा नाम रोहित है। मुझे मोतियाबिंद बताया गया है लेकिन देखने में कोई परेशानी नहीं है। क्या मुझे आपरेशन कराना चाहिए?
आप डाक्टर से संपर्क में रहिये। जब तक देखने में कोई परेशानी ना हो तब तक आपरेशन की कोई जरूरत नहीं है लेकिन डाक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहना होगा। जब आपको लगे कि देखने में परेशानी होने लगी है तो आपरेशन करा लें। अगर देखने में कोई परेशानी नहीं है और मोतियाबिंद बढ़ रहा है तो भी आपरेशन करा लें।
डाक्टर साहबर मै प्रह्लाद सिंह बोल रहा हूं। मेरी आयु 67 वर्ष और आंखों में जलन रहती है।
जैसा कि आपने बताया आपकी आयु अधिक है। आप डाक्टर की जरूर दिखाएं। पानी से आंखों को साफ करते रहें। आप डाक्टर को दिखाएं। क्योंकि बीमारी के कई कारण सकते हैं। अगर आप के आस-पास धुआं रहता है तो उस से बचें। साफ पानी से आंखों को साफ करें।
मेरा नाम समीर गुप्ता है। मेरी आंखों में सूखापन रहता है। क्या करूं?
क्या आप किसी बीमारी की दवा खाते हैं या कंप्यूटर पर अधिक समय काम करते हैं। कई बार किसी बीमारी की दवा खाने से आंखों में सूखापन हो जाता है और कई बार कंप्यूटर पर अधिक काम करने से आंखों में सूखापन हो जाता है। इसके लिए घबराएं नहीं। आप डाक्टर को दिखा लें और वह आपको ऐसी दवा देगा, जो सुखापन में राहत देगा।
इसके अलावा कंप्यूटर पर काम करते समय आंखों को राहत देते रहे। यानी 20-25 मिनट में सीट छोड़कर कुछ कदम चले। कुछ सेकंड आंखों को बंद स्खे। राहत मिलेगी।
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